आज भारतीय संसद से लेकर वैश्विक बाजारों तक, हर जगह केवल एक ही चर्चा है—भारत और अमेरिका के बीच हुआ नया व्यापार समझौता। इस समझौते ने न केवल कूटनीतिक संबंधों को मजबूत किया है, बल्कि भारतीय निर्यातकों और आम जनता के लिए अवसरों के नए द्वार खोल दिए हैं।
1. कृषि और डेयरी क्षेत्र: सरकार ने खेला 'सुरक्षित दांव'
अक्सर विदेशी समझौतों में यह डर रहता है कि सस्ते आयात से हमारे स्थानीय किसान पिछड़ जाएंगे। लेकिन वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में देश को आश्वस्त किया है कि:
* सुरक्षा कवच: भारत के संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों को इस समझौते के तहत विशेष सुरक्षा दी गई है।
* कोई समझौता नहीं: सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले इन क्षेत्रों के हितों की बलि नहीं दी गई है।
2. टैरिफ में ऐतिहासिक गिरावट: निर्यातकों की चांदी
इस डील का सबसे बड़ा आकर्षण अमेरिकी टैरिफ (Tariff) में आई भारी कटौती है।
* पहले भारतीय सामानों पर लगने वाला 50% टैरिफ अब घटकर मात्र 18% रह गया है।
* किसे होगा लाभ? इससे भारत के कपड़ा (Textiles), रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewelry), और आईटी सेवाओं को अमेरिकी बाजार में बड़ी बढ़त मिलेगी। अब 'मेड इन इंडिया' उत्पाद अमेरिका में सस्ते और अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे।
3. मजबूत होता रुपया: अर्थव्यवस्था में नई जान
जैसे ही इस डील की खबर बाजारों में फैली, भारतीय रुपया (INR) रॉकेट की तरह ऊपर गया।
* रुपया डॉलर के मुकाबले 90.4 के स्तर पर पहुँच गया है।
* महंगाई पर लगाम: मजबूत रुपया कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स के आयात को सस्ता बनाएगा, जिससे देश में बढ़ती महंगाई को कम करने में मदद मिल सकती है।
प्रमुख बिंदु: एक नज़र में
अमेरिकी टैरिफ - 50% से घटकर 18% हुआ
रुपये की वैल्यू - ₹90.4 प्रति डॉलर (मजबूत स्थिति)
संरक्षित क्षेत्र - कृषि और डेयरी (स्थानीय किसानों का हित सुरक्षित)
मुख्य फोकस - निर्यात में वृद्धि और रोजगार सृजन
निष्कर्ष
यह व्यापार समझौता केवल कागजों पर हस्ताक्षर नहीं है, बल्कि यह 'विकसित भारत 2047' की दिशा में एक साहसिक कदम है। अमेरिका जैसे विशाल बाजार तक आसान पहुंच मिलने से भारतीय उद्योगों को नई ऑक्सीजन मिलेगी। पीयूष गोयल के नेतृत्व में भारत ने यह साबित कर दिया है कि वह अपनी शर्तों पर वैश्विक व्यापार करने की क्षमता रखता है।
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