आजकल सोशल मीडिया पर एक नाम तेज़ी से गूँज रहा है—Mike Okay।
29 साल के इस ब्रिटिश व्लॉगर ने वह कर दिखाया है जो बड़े-बड़े विज्ञापन अभियान नहीं कर पाए। माइक ने मात्र पाँच दिनों के भीतर भारत के चार कोनों—कश्मीर, नागालैंड, राजस्थान और केरल—की यात्रा की। लेकिन यह कोई साधारण 'ट्रैवल व्लॉग' नहीं था; यह उन पुराने और घिसे-पिटे स्टीरियोटाइप्स (stereotypes) के खिलाफ एक जंग थी, जो अक्सर पश्चिमी मीडिया में भारत के बारे में दिखाए जाते हैं।
नकारात्मकता को चुनौती: क्यों खास है यह यात्रा?
अक्सर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत को केवल भीड़-भाड़, गरीबी या अव्यवस्था के नजरिए से पेश किया जाता है। माइक ने इसी धारणा को जड़ से उखाड़ने का फैसला किया। उन्होंने अपनी यात्रा के जरिए दुनिया को दिखाया कि भारत की असलियत उसकी विविधता (Diversity) और मेहमाननवाज़ी (Hospitality) में छिपी है।
एक अद्भुत सफर: उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम
माइक की यह 'तूफानी' यात्रा भारत के अलग-अलग रंगों को समेटे हुए थी:
* कश्मीर की वादियों से शुरुआत: माइक ने दुनिया को दिखाया कि कश्मीर सिर्फ 'विवाद' नहीं, बल्कि जन्नत जैसी शांति और खूबसूरती का घर है।
* नागालैंड का अनूठा रंग: उत्तर-पूर्व के इस छिपे हुए रत्न की संस्कृति और वहाँ के लोगों की सादगी ने माइक के दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
* राजस्थान की भव्यता: रेगिस्तान की रेत और राजसी किलों के बीच माइक ने भारत के गौरवशाली इतिहास को करीब से देखा।
* केरल का सुकून: 'गॉड्स ओन कंट्री' में हरियाली और बैकवाटर्स के जरिए उन्होंने भारत के आधुनिक और प्राकृतिक संतुलन को पेश किया।
वायरल होने की असली वजह
माइक के वीडियो केवल सुंदर नज़ारों के बारे में नहीं हैं। उनकी लोकप्रियता की मुख्य वजह उनकी ईमानदारी है। उन्होंने दिखाया कि कैसे एक विदेशी पर्यटक भारत की गलियों में खुद को सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर सकता है। उनके कमेंट सेक्शन में भारतीयों का प्यार और गर्व साफ देखा जा सकता है, जो उनके इस प्रयास की सराहना कर रहे हैं।
निष्कर्ष
माइक ओके की यह पहल हमें याद दिलाती है कि दुनिया को देखने का नज़रिया बदलना कितना ज़रूरी है। उन्होंने साबित कर दिया कि भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि एक अनुभव है, जो हर मील पर बदल जाता है। जहाँ लोग हफ्तों में भी एक राज्य नहीं देख पाते, वहाँ माइक ने 5 दिन में पूरे भारत की आत्मा को छू लिया।
"भारत को समझने के लिए उसे देखना नहीं, महसूस करना पड़ता है।" — और माइक ने बखूबी यही किया।
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